तुमसे मिलने के बाद अब एक ही डर सताता है मुझे
कही तुम मजबूरियों का नाम देकर दूर ना हो जाओ
जरुरी नहीं की कुछ तोड़ने के लिए पत्थर ही उठाओ
बस लहजा बदल कर बोलने से ही दिल टूट जाता है दोस्त
मेरे एब तो जमाने में उजागर है
फ़िक्र तो वो करे जिनके गुनाह पर्दे में है
वो मुझे नहीं चाहता तो क्या हुआ
क्या बस इतनी सी बात पर मई उसे चाहना छोड़ दू
जिन्दा है ताजमहल की चाहत अब तक गवाह है मुमताज की उल्फत अब तक
जाके देखो ताजमहल को ये दोस्तो पत्थर से टपकती है मोहब्बत अब तक
खुदखुशी करने से मुझे कोई परहेज नहीं है यार
बस शर्त इतनी हो की फ़ासी का फंदा तेरे दुपट्टे का हो
हजार शिकवे कई दिनों की बेरुखी
बस उनकी एक हसी और सब रफा दफा
हम देते रहे उसे मोहब्बत की दुहाई
जो शख्स कानो से नहीं दिल से बहरा था
खुशमिजाज मशहूर है हमारी सादगी भी कमाल है
हम शरारती भी इंतेहा के है तनहा भी बेमिसाल है
रिवाज तो यही है दुनिया का मिल के बिछड़ जाना
तुम से ये कैसे रिश्ता है न मिलते हो न बिछड़ते हो
सिर्फ गुलाब देने से मोहब्बत हो जाती
तो माली सारे शहर का महबूब बन जाता
तेरी अदाओ का मेरे पास कोई जवाब नही
अब मेरी आखो में तेरे शिवा कोई ख़्वाब नहीं है
जन्नत की परवाह तो उन्हें होती है जिन्होंने जन्नत नहीं देखी
मेरी जन्नत तो तुमसे शुरू और तुम्ही पर ख़त्म होती है
प्यार करने की कोई वजह नहीं होती
उसने रोकर कहा इजाजत है
हमने हसकर कहा खुदा हाफिज
दिल मजबूर करता है वरना तुझे
याद करने से कोई पुण्य थोड़ी न मिलता है
तुम बिन सब अधूरा
मोहब्बत और नौकरी दोनों एक जैसी होती है
आदमी करता रहेगा रोता रहेगा पर छोड़ेगा नहीं
मेरे बाद वफ़ा का धोखा और किसी से मत करना
गाली देगी दुनिया तुझको सर मेरा झुक जाएगा
मुस्कान मुस्कुराहट शायरी
जन्नत की परवाह तो उन्हें होती है जिन्होंने जन्नत नहीं देखी
मेरी जन्नत तो तुमसे शुरू और तुम्ही पर ख़त्म होती है
प्यार करने की कोई वजह नहीं होती
उसने रोकर कहा इजाजत है
हमने हसकर कहा खुदा हाफिज
दिल मजबूर करता है वरना तुझे
याद करने से कोई पुण्य थोड़ी न मिलता है
तुम बिन सब अधूरा
मोहब्बत और नौकरी दोनों एक जैसी होती है
आदमी करता रहेगा रोता रहेगा पर छोड़ेगा नहीं
मेरे बाद वफ़ा का धोखा और किसी से मत करना
गाली देगी दुनिया तुझको सर मेरा झुक जाएगा
मुस्कान मुस्कुराहट शायरी